भारत दे परिवारें ते विदेशें च रौह्ने आह्ले भारतीयें लेई

समारोह

विवाह और वैवाहिक समारोह

सगाई से विदाई तक — विधि उत्सव में खो न जाए।

जदूं सगाई, वरमाला, फेरों और विदाई के दिनों में।
क्षेत्र वर और वधू, दोनों कुल

विवाह एक घर का उत्सव है और दो कुल का मिलन भी। सजावट बड़ी हो सकती है, पर सप्तपदी, कन्यादान और दोनों पक्षों की अपनी रीति छोटी नहीं होती। एक ही विधान दोनों पर थोपना ठीक नहीं। पहले पूछें कि किस कुल में क्या अनिवार्य है।

प्रतिष्ठान मंडप की दुकान नहीं है। हम क्रम लिखते हैं — क्या अग्नि के सामने होता है, क्या अतिथियों के बीच, और क्या केवल परिवार के। मुहूर्त का अंतिम निर्णय आपके ज्योतिषी या पुरोहित का रहेगा। अनुरोध में शहर, अनुमानित माह और दोनों कुल की शाखा लिखें।

एह् इक सामान्य परिचय ऐ। कुल, क्षेत्र ते शाखा दे अनुसार क्रम, सामग्री ते मुहुरात च बदलाव होंदा ऐ। अपने पुजारी ते अपने संस्कार गी अंतिम समझो।

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