पूजा
अखंड रामायण।
बिना रुकावट के रामायण के पाठ - प्रायः एक दिन आ एक राति के लेल |
जखन
परिवार संकल्प दिवस। पाठकक समूह पहिने सँ तय करबाक चाही।
अखंड रामायण मे पाठ नहि रुकैत अछि। जँ एक पाठक थाकि जाइत छथि तँ दोसर अपन काज सम्हारैत छथि , मुदा पाठ खुजल रहैत अछि आ स्वर अक्षुण्ण रहैत अछि । मानस हो वा वाल्मीकि, घरक जे परम्परा हो, ओकर पालन करबाक चाही। ई एकटाक काज नहि थिक। पहिने राति के पाली के बंटवारा करू।
भोजन, पानि आ आराम सेहो एहि व्यवस्थाक हिस्सा अछि। पाहुनकेँ जबरदस्ती बैसब सत्कार नहि होइत छैक। जे सुनि सकैत अछि ओकरा सुनबाक चाही, जे नहि सुनि सकैत अछि ओकरा आशीर्वाद लेबाक चाही।
ई एकटा सामान्य परिचय अछि | कुल, क्षेत्र आ शाखाक अनुसार क्रम, सामग्री आ मुहुरत भिन्न-भिन्न होइत अछि । अपन पुरोहित आ अपन संस्कार केँ अंतिम बुझू।