समारोह
विवाह और वैवाहिक समारोह
सगाई से विदाई तक — विधि उत्सव में खो न जाए।
जब
सगाई, वरमाला, फेरों और विदाई के दिनों में।
क्षेत्र
वर और वधू, दोनों कुल
विवाह एक घर का उत्सव है और दो कुल का मिलन भी। सजावट बड़ी हो सकती है, पर सप्तपदी, कन्यादान और दोनों पक्षों की अपनी रीति छोटी नहीं होती। एक ही विधान दोनों पर थोपना ठीक नहीं। पहले पूछें कि किस कुल में क्या अनिवार्य है।
प्रतिष्ठान मंडप की दुकान नहीं है। हम क्रम लिखते हैं — क्या अग्नि के सामने होता है, क्या अतिथियों के बीच, और क्या केवल परिवार के। मुहूर्त का अंतिम निर्णय आपके ज्योतिषी या पुरोहित का रहेगा। अनुरोध में शहर, अनुमानित माह और दोनों कुल की शाखा लिखें।
यो सामान्य परिचय हो। वंश, क्षेत्र र शाखा अनुसार क्रम, विषयवस्तु र मुहूर्त फरक-फरक हुन्छन्। आफ्नो पुजारी र आफ्नो अनुष्ठानलाई अन्तिम मान्नुहोस।