भारतस्य परिवाराणां कृते विदेशेषु निवसतां भारतीयानां च कृते

उत्सवः

सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

मिलन, सम्मान, मेला और लोक-प्रस्तुति — क्षेत्र का रूप बनाए रखें।

यदा संस्था की सालगिरह, मोहल्ले का मिलन, या नगर का मेला।
क्षेत्र मोहल्ला, संस्था और नगर

सामाजिक कार्यक्रम परंपरा का सार्वजनिक चेहरा होता है। गरबा, घूमर, रामलीला या भाषा का मिलन — रूप स्थानीय रहे तो सम्मान बना रहता है। बाहर से एक ही सजावट सब पर चढ़ाना संस्कृति नहीं, नकल है। पहले यह लिखें कि किस क्षेत्र की रीति दिखानी है।

प्रतिष्ठान मंच और टिकट नहीं बेचता। हम बताते हैं कि किस अंश को परंपरा कहना ठीक है, और किस अंश को केवल उत्सव। अनुरोध में स्थान, अनुमानित संख्या और यह लिखें कि दर्शक कौन हैं — अपने क्षेत्र के लोग, या मिश्रित सभा।

एतत् सामान्यपरिचयम् । क्रमः, सामग्रीः, मुहूर्तं च कुलप्रदेशशाखानुसारं भिद्यते । भवतः पुरोहितं भवतः संस्कारं च अन्तिमं मन्यताम्।

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